बकरीद क्यों मनाई जाती है? जानिए कुर्बानी की असली वजह!
बकरीद – सिर्फ एक त्योहार नहीं, एक पैग़ाम है ईमान और कुर्बानी का।
हर साल इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक ज़िल-हिज्जा की 10 तारीख को ईद-उल-अज़हा, जिसे आम भाषा में बकरीद कहा जाता है, मनाई जाती है। यह त्योहार हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की उस ऐतिहासिक कुर्बानी की याद दिलाता है जो उन्होंने अल्लाह की रज़ा के लिए दी थी।
कुर्बानी की कहानी:
हज़रत इब्राहीम को अल्लाह का हुक्म हुआ कि वो अपने सबसे प्यारे चीज़ की कुर्बानी दें।
उन्होंने अपने बेटे, हज़रत इस्माइल को अल्लाह की राह में कुर्बान करने का इरादा कर लिया।
जब उन्होंने अपने बेटे की आंखों पर पट्टी बांधकर कुर्बानी देने की कोशिश की, तो अल्लाह ने उनके इम्तिहान को क़बूल करते हुए, बेटे की जगह एक दुम्बा (मेंढा) भेज दिया।
इस ऐतिहासिक वाक़िये से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की राह में अगर सच्ची नियत और ईमानदारी हो, तो खुदा कभी हमारे इरादों को ज़ाया नहीं करता।
🕌 बकरीद का पैग़ाम:
ये त्योहार हमें सिखाता है त्याग, ईमान और एकता।
समाज के गरीब और ज़रूरतमंद लोगों की मदद करना इस दिन का अहम हिस्सा है।
कुर्बानी का गोश्त तीन हिस्सों में बाँटा जाता है –
एक हिस्सा खुद के लिए,
दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए,
और तीसरा ज़रूरतमंदों के लिए।
🙏 आखिर में:
बकरीद हमें सिर्फ जानवर की कुर्बानी नहीं, बल्कि अपने अंदर के घमंड, ईर्ष्या और नफरत की कुर्बानी देना सिखाती है।
यह दिन है इंसानियत, प्यार और भाईचारे को अपनाने का।
👉 आप क्या सोचते हैं बकरीद के इस खूबसूरत पैग़ाम के बारे में? कमेंट में ज़रूर बताएं।

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